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शिक्षा.विभाग

अजमेर जोन अजमेर की पदोन्नति लिस्ट दिनांक 18 दिसम्बर 2014 

 अंग्रेजी   हिंदी   गणित   शा. शि.  संस्कृत  विज्ञान 
 Ajmer_Zone_english_18dec.pdf  Ajmer_Zone_hindi_18dec.pdf Ajmer_Zone_maths_18dec.pdf
 Ajmer_Zone_pti_18dec.pdf Ajmer_Zone_sanskrit_18dec.pdf  Ajmer_Zone_science_18dec.pdf

 

  GA 55 का प्रिंट आउट लेने के लिए 

निम्न लिंक पर Click करे 

http://paymanager2.raj.nic.in/

इस लिंक में खुली स्क्रीन में  Employee को Select कर  login करे

Login screen में User Name = EmployeeID

(ex.RJJP200717015189)

Password = पहली बार आपकी जन्म दिनांक जैसे 07051964

या आपके बैंक खाते के अंतिम चार अंक जैसे  5105846 8756


(जैसा निचे चित्र में दिखाया गया है )

अब  Login  पर Click करे 

आयकर गणना प्रपत्र वित्तीय वर्ष 2014-2015 

  गोपाल लाल सुथार प्रधानाचार्य राउमावि बिजोलिया  


IT_Calc_17.12.14_GLS.xlsx

 

 

 

 

 

Login पर Click करते ही निम्न password बदलने की screen खुलेगी 

प्रथम चित्र में दिखाई गयी Login screen में

User Name = EmployeeID(ex.RJJP200717015189)

Password =  जो अभी बदला गया है या पहले बदल दिया गया है 

टाईप करे व 

अब  Login  पर Click करे 

Click करते ही आपके सामने निम्न Window ओपन हो जाएगी 

  p2.jpg

p3.jpg

इसमें वांछित password  टाईप कर Submit पर Click करे 

आप पुनः paymanager की screen पर पहुँच जायेंगे 

 pm4.jpg

इसमें GA 55 Employee Detail पर Click करने पर निम्नानुसार Screen खुल जायेगी 

pm5.jpg

ऊपर दिखाई गयी स्क्रीन में Estimated या Non Estimated को सेलेक्ट करे 

इसके बाद PDF Format  पर Click करते ही आपकी GA 55 Detail डाऊनलोड हो जाएगी 

इसके आधार पर आप अपनी आयकर विवरणी तैयार कर सकते है 

       

 

newicon.gif

आयकर गणना प्रपत्र वित्तीय वर्ष 2014-2015 

गोपाल लाल सुथार प्रधानाचार्य रा उ मा वि बिजोलियाँ

(Last updated 17 Dec 2014 17.49 PM)

(श्री नरेन्द्र कुमार तातेड ATO Sub TreasuryBanera का आभार  सीनियर सिटिज़न टैक्स अपडेट)

(नवीन जागेटिया DEO Sec I Bhilwara का आभार  Deduction Under Chap VIA अपडेट)

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excel-image1.png

 

              pathmeda.jpg              

new.gifअजमेर जोन अस्थाई वरिस्ठ्ता सूची द्वितीय वेतन श्रृखला

अध्यापक सत्र 2008-2009

download-1.jpg

 Ajmer_Zone_Seniority_2008-09_ii_grade.pdf 

राजस्थान के सभी जिलों की पात्रता वरिस्ठ्ता व् स्थानान्तरण सूचिया देखने के लिए 

http://www.rssrashtriya.org/

     
  आत्महत्या कर रहे मासूम बच्चों का जीवन अनमोल है।   
 

आत्महत्या कर रहे मासूम बच्चों का जीवन अनमोल है। ऐसा भयानक कदम उठाने के लिए कोनसी घटनाये जिम्मेदार है। हम बालको को ये क्यों नहीं सीखा रहे है हर घटना हमारे अनुकूल नहीं होती । जीवन में प्रतिकूल परिस्थितिया भी आती है।

    मित्रों आजकल अख़बारों में विद्यालयी छात्रों द्वारा आत्महत्या की खबरे पढ़ मन बहुत ही विचलित और उद्विग्न हो जाता है।मित्रों क्या वाकई आज के शिक्षक इतने क्रूर और निरंकुश हो गए या आजकल के छात्र संवेदनहीन और अविवेकी हो गए कि एक शिक्षक द्वारा उनके भविष्य निर्माण हेतु उठाये जाने वाले अल्प कटु व्यवहार से वो इतने विचलित और निराश हो जाते हैं कि आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठा लेते हैं???
         मित्रों इसके लिए कौनसी परिस्थितियां ज्यादा जिम्मेदार ?कहीं न कहीं खामी जरूर है।और उस खामी को चिन्हित कर दूर नहीं किया गया तो ऐसे समाचार ये मीडिया रोज़ प्रकाशित करेगा।
      दोस्तों ऐसी परिस्थिति में परिजनों को सबसे पहले जागरूक होना पड़ेगा।अपने बच्चे पर नियमित रूप से नजर रखनी होगी।उसके दैनिक व्यवहार को अवलोकित करते रहना होगा कि उसका व्यवहार कहीं उसकी मनोवृत्ति के विपरीत तो नहीं नज़र आ रहा आपको !अगर ऐसा लग रहा हो तो बच्चे अत्यंत विनम्रता पूर्वक पूछिए कि वो इतना उद्विग्न और परेशान क्यों है?विद्यालय जाकर अध्यापक से पूछिए,उसके सहपाठी छात्रो से पूछिए कि कोई विशेष बात या घटनाये तो नहीं घटित हो रही उसके साथ।विद्यालय में होने वाली अभिभावक बैठकों की उपेक्षा मत कीजिये और हर हाल में वहाँ जाइए और अपने बच्चे की पूरी रिपोर्टिंग लीजिये।बच्चों को समझाइये कि विद्यालय में घटने वाली हर घटना से परीजनों को अवगत कराये।अध्यापकों को भी समझाइये कि अगर बच्चा नहीं पढता तो हमें अवगत कराइये।बच्चे की तरफ से किसी भी सूरत में लापरवाह मत होइए।और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकिये।
       अंत में एक बात मीडिया से बोलना चाहूँगा कि कृपया ऐसे समचारों को इतनी प्रमुखता से मत प्रकाशित कीजिये क्योंकि कल जिस छात्र ने आत्महत्या की है वो उसी समाचार की परिणति है जो चन्द रोज़ पूर्व प्रकाशित हुआ था ऐसा लगा जैसे इस छात्र ने उस छात्र की घटना से सीख ली हो और अपने जीवन में उतार ली हो।इस छात्र ने ही हूबहू वही किया जो पिछली दुर्घटना वाले छात्र ने की।वही स्टाइल,वही पत्र, वही पत्र का मज़मून,वही पीड़ा और वही कष्ट।
      सज्जनों समय रहते नहीं चेते तो कल फिर अखबार की सुर्ख़ियों में इसी सन्दर्भ के समाचार पढ़ने को मजबूर होना होगा और कोई संदेह नहीं कि अगला बच्चा आपका या मेरा हो।सिर्फ शिक्षक वर्ग को कोसना या दोषी ठहराना किसी भी सूरत में न्यायसंगत एवं तर्कसंगत सोच नहीं है,कहीं न कहीं हम भी उतने ही जिम्मेवार हैं जितने शिक्षक क्योंकि हम सचेत रहे तो ऐसी घटनाएं हो ही नहीं सकती।क्योंकि पौराणिक कालीन शिक्षण व्यवस्था में तो शिक्षक इतने कठोर और घोर दंडाधिकारी हुवा करते थे कि शिष्यों की उनसे आँख मिलाने तक की हिम्मत नहीं हुआ करती थी फिर भी कभी किसी शिष्य के आत्मघात का वृतांत कहीं नहीं मिलता।
    मित्रों आप क्या सोचते हैं,या आपके क्या सुझाव है इन घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु।आप सभी से अपेक्षा करता हूँ कि आप अपने व्यस्त जीवन में से कुछ क्षण निकाल कर मासूमों का जीवन बचाने के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव अवश्य प्रस्तुत करें इसी आशा के साथ।


 
     

 

वरिष्ठता  सूची अजमेर मंडल अजमेर (जुलाई 2014)

english 13-14 and 14-15.pdf

hindi 13-14 and 14-15.pdf

maths 13-14 and 14-15.pdf

sanskrit 13-14 and 14-15.pdf



 


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